शरद पूर्णिमा, जिसे कोजागरी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा, कौमुदी पूर्णिमा आदि नामों से भी जाना जाता है, हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यह त्योहार मानसून की विदाई और फसल कटाई की शुरुआत के बीच आता है, जब आकाश साफ एवं चंद्रमा अपने पूर्ण प्रकाश में दिखाई देता है।
शरद पूर्णिमा की यह खास बात मानी जाती है कि चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होकर अमृत वर्षा करते हैं, और इस रात को विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।
शरद पूर्णिमा 2025: तिथि, समय एवं मुहूर्त
| विवरण | समय / अंक |
|---|---|
| तारीख | सोमवार, 6 अक्टूबर 2025 |
| पूर्णिमा तिथि प्रारंभ | 6 अक्टूबर, दोपहर 12:23 बजे |
| पूर्णिमा तिथि समापन | 7 अक्टूबर, सुबह 09:16 बजे तक |
| चांद उठने का समय | लगभग शाम 5:33 बजे (स्थान अनुसार भिन्न हो सकता है) |
| नक्षत्र / योग आदि | इस वर्ष उत्तराभाद्रपद नक्षत्र रहेगा, साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जिससे आज का दिन और अधिक शुभ माना जा रहा है। |
नोट: उपरोक्त समय दिल्ली / सामान्य स्थानों के अनुसार है। क्षेत्र विशेष के अनुसार पंचांग देखें और स्थानीय पंडित जी से पुष्टि करें।
शरद पूर्णिमा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
1. अमृत वर्षा की मान्यता
धार्मिक मान्यता है कि इस रात को चंद्रमा की किरणें अमृत (स्वास्थ्य व दिव्यता) लेकर आती हैं। इसलिए खीर, दूध या अन्य प्रसाद को खुली छत या खुले आकाश में चांदनी में रखा जाता है।
2. देवी लक्ष्मी व भगवान विष्णु की पूजा
इस दिन देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विशेष पूजा का विधान है। कहा जाता है कि माँ लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं और उन घरों पर अपनी कृपा बरसाती हैं जहाँ लोग जागरण करते हैं।
3. रास लीला (Radha-Krishna)
कुछ पुराणों और भक्तिग्रंथों में वर्णन है कि भगवान कृष्ण ने इस पूर्णिमा की रात को ब्रज की गोपियों के साथ रास लीला की थी। इस कथा के कारण इसे रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
4. फसल एवं कृषि से जुड़ी मान्यताएँ
मान्यता है कि यह त्योहार मानसून की विदाई और सुखद मौसम की शुरुआत का संकेत है। अनेक कृषक इसे कृषि उत्सव के रूप में मनाते हैं।
5. दान, व्रत एवं पुण्य कर्म
इस दिन दान, तर्पण, दान-पुण्य करने को विशेष महत्व दिया जाता है। शुभ फल प्राप्त करने के लिए की जाने वाली पूजा और व्रत पापों को शांत करने तथा जीवन में समृद्धि लाने वाला माना जाता है।

शरद पूर्णिमा 2025: पूजा-विधि और आचार
- स्वच्छ स्नान और शुद्ध आत्मा
सुबह स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें। - मंत्र जाप और स्तुति
“ॐ श्रीँ लक्ष्म्यै नमः” या अन्य लक्ष्मी व विष्णु स्तुति और मंत्र जाप किया जाता है। - खीर या दूध-चावल प्रसाद
खीर (दूध और चावल से बनी मीठी व्यंजन) को रात में चांदनी में रखें ताकि वह अमृत कमाए। अगले दिन सुबह वह प्रसाद ग्रहण करें। - जागरण और रात्रि पूजा
इस रात को जागरण करना, कीर्तन करना, स्तुति पाठ करना शुभ माना जाता है। - दान देना
अन्न, वस्त्र, धन या अन्य सामग्री का दान करना पुण्य माना जाता है। - प्रदान की व्रती महिलाएँ
कुछ स्थानों पर विवाह योग्य युवतियाँ इस दिन व्रत रखती हैं, मंगल फल की कामना करती हैं।
निष्कर्ष
शरद पूर्णिमा 2025 न केवल एक धार्मिक त्योहार है, बल्कि यह प्रकृति, अन्न, चंद्रमा और आध्यात्मिक ऊर्जा के बीच का सुसमंजन भी है।
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