अगर आप भक्ति गीत सुनना पसंद करते हो, तो “श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी” वाला भजन तो आपने जरूर सुना होगा। ये भजन इतना प्यारा और मधुर है की सुनते ही मन में एक अजीब सी शांति उतर आती है। मंदिरों में, भजन संध्या में और घर पे पूजा करते टाइम ये गाना लोग गाते है।
भजन का लिरिक्स (हिंदी में)
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी
सच्चिदानंद रूपाय, विश्वोत्पत्यादिहेतवे,
तापत्रय विनाशाय, श्री कृष्णाय वयं नम: ।।
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा।।
हे नाथ नारायण…
पितु मात स्वामी, सखा हमारे,
हे नाथ नारायण वासुदेवा।।
हे नाथ नारायण…
बंदी गृह के, तुम अवतारी,
कहीं जन्मे, कहीं पले मुरारी,
किसी के जाए, किसी के कहाये,
है अद्भुत, हर बात तिहारी।
गोकुल में चमके, मथुरा के तारे,
हे नाथ नारायण वासुदेवा।।
अधर पे बंशी, ह्रदय में राधे,
बट गए दोनों में, आधे आधे,
हे राधा नागर, हे भक्त वत्सल,
सदैव भक्तों के, काम साधे।
वही गए जहाँ गए पुकारे,
हे नाथ नारायण वासुदेवा।।
गीता में उपदेश सुनाया,
धर्म युद्ध को धर्म बताया,
कर्म तू कर, मत रख फल की इच्छा,
यह संदेश तुम्ही से पाया।
अमर है गीता के बोल सारे,
हे नाथ नारायण वासुदेवा।।
त्वमेव माता च पिता त्वमेव,
त्वमेव बन्धु सखा त्वमेव,
त्वमेव विद्या ध्रविणम् त्वमेव,
त्वमेव सर्वं मम देव देवा।
श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी…
राधे कृष्णा राधे कृष्णा,
राधे राधे कृष्णा कृष्णा।
राधे कृष्णा राधे कृष्णा,
राधे राधे कृष्णा कृष्णा।
हरी बोल, हरी बोल,
हरी बोल, हरी बोल।
राधे कृष्णा राधे कृष्णा,
राधे राधे कृष्णा कृष्णा।
राधे कृष्णा राधे कृष्णा,
राधे राधे कृष्णा कृष्णा।
ये लाइन बार-बार रिपीट होती है और सुनते-सुनते दिल में बस जाती है। इसमें भगवान श्री कृष्ण को अलग-अलग नाम से पुकारा गया है – कृष्ण, गोविंद, हरे, मुरारी, नारायण, वासुदेव – हर नाम में उनका अलग रूप और महिमा छुपी हुई है।

भजन का अर्थ
इस भजन में हम भगवान कृष्ण को याद कर रहे हैं, उनसे अपने सारे दुख-दर्द दूर करने की प्रार्थना कर रहे हैं। “गोविंद” का मतलब है गायों के रक्षक, “मुरारी” का मतलब है मुर नाम के राक्षस का संहार करने वाले, और “वासुदेवा” मतलब वसुदेव के पुत्र। ये सारे नाम सिर्फ नाम नहीं, बल्कि उनके जीवन की कहानियों और लीलाओं से जुड़े हुए हैं।
भजन का महत्व
भक्त मानते है की सुबह-सुबह या रात में सोने से पहले इस भजन का जाप करने से मन शांत होता है और नेगेटिव एनर्जी दूर हो जाती है। कई लोग कहते है की ये गाना सुनते-सुनते ध्यान अपने आप लग जाता है और अंदर से खुशी मिलती है। खासकर जन्माष्टमी, गीता जयंती या किसी भी कृष्ण भक्ति वाले पर्व पर इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
भक्ति में डूबने का तरीका
अगर आप इस भजन को गाते समय आँख बंद करके भगवान के रूप का ध्यान करते हो, तो मन और भी लगने लगता है। चाहो तो इसे हारमोनियम या बांसुरी की धुन के साथ गा सकते हो – वैसे बांसुरी तो श्री कृष्ण की पहचान ही है।
निष्कर्ष
“श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी” सिर्फ एक भजन नहीं, ये भगवान से जुड़ने का एक जरिया है। अगर आपने अभी तक इसे ध्यान से नहीं सुना, तो एक बार जरूर सुनिए, शायद आपका मन भी श्री कृष्ण की भक्ति में रंग जाए।
।। राधे राधे।।
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